Category: Aarti

Surya Dev Ji Ki Aarti

सूर्य देव जी की आरती ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।। सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत...

Shyam Baba Ji Ki Aarti

श्याम बाबा जी की आरती ॐ जय श्री श्याम हरे , बाबा जय श्री श्याम हरे |खाटू धाम विराजत, अनुपम रुप धरे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे….रत्न जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुले|तन...

Santoshi Mata Ji Ki Aarti

संतोषी माता की आरती जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता ।अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥जय सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो ।हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ॥ जय गेरू...

Radha Ji Ki Aarti

श्री राधा जी की आरती ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्णश्री राधा कृष्णाय नमः .. घूम घुमारो घामर सोहे जय श्री राधापट पीताम्बर मुनि मन मोहे...

Parvati Ji Ki Aarti

पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माताब्रह्मा सनातन देवी शुभफल की दाता ।। अरिकुलापदम बिनासनी जय सेवक्त्राता,जगजीवन जगदंबा हरिहर गुणगाता ।। सिंह को बाहन साजे कुण्डल हैं साथा,देबबंधु जस गावत नृत्य...

Devi Annapoorna Ji Ki Aarti

देवी अन्नपूर्णा जी की आरती बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम… जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार… प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।सुर सुरों...

Brihaspati Dev Ji Ki Aarti

बृहस्पति देव की आरती जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब...

Kali Mata Ji Ki Aarti

काली माता की आरती मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे।पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।। जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे।सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली,...

Durga Ji Ki Aarti

दुर्गा जी की आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावतमैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।| जय अम्बे गौरी ॥ माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद...

shanidev

Shani Dev Ji Ki Aarti

शनि देवजी की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है...